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Halal Daulat – Business Knowledge for Muslim Entrepreneurs
Halal Daulat Book Cover

इस किताब में आप वो सारी बिज़नेस नॉलेज हासिल करेंगे जिसे कुछ जाने माने बिज़नेस कोच 30,000 से 10,0000 रुपए में बेच रहे हैं।

ये वही बिज़नेस नॉलेज है जिस पर दुनिया भर के कामयाब बिज़नेस चलते हैं।

जिससे कंपनियाँ तय करती हैं

  • सेल्स कैसे बढ़े
  • प्राइस क्या हो
  • कैश फ्लो कैसे संभाला जाए
  • लोगों के दिमाग़ में अपना ब्रैंड कैसे जमाया जाए
  • और बिज़नेस ओनर के बिना भी सिस्टम कैसे चले
एक प्लेट बिरयानी और कबाब की क़ीमत से भी कम में। अभी आर्डर कीजिये।
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किताब मिलने के बाद एक भी चैप्टर लागू करके देखें — फ़र्क़ न दिखे तो पूरे पैसे वापस। कोई सवाल नहीं।

एक आम कारोबारी के लिए ये सारी जानकारी एक जगह, आसान ज़बान में अवेलबल नहीं थी। इसलिए नहीं कि ये सीक्रेट था — बल्कि इसलिए कि ये knowledge कॉलेजों, मैनेजमेंट की किताबों और कॉर्पोरेट ट्रेनिंग तक मेहदूद थी।

आपके पास वहाँ बैठने का वक़्त नहीं है। और दुकान, ऑफिस या फैक्ट्री छोड़कर एमबीए करने जाना भी शायद मुमकिन न हो।

इस किताब का मक़सद वही प्रैक्टिकल समझ आपको देना है — बिना भारी थ्योरी, बिना टेक्निकल लैंग्वेज — ताकि आप बिज़नेस चलाते हुए ही उसे सुधार सकें। बेहतर बना सकें।

मैं पिछले तीस साल से देख रहा हूँ — कितने बिज़नेसमैन सुबह से रात तक काम करते हैं। साल के आख़िर में उसी जगह होते हैं जहाँ शुरुआत में थे।

सुबह जल्दी।
रात देर तक।
सब कुछ ख़ुद करते हैं।

साल ख़त्म — वही सेल्स, वही ख़र्चे, वही परेशानी। बस थकान ज़्यादा।

दुकान न खोलें तो सेल्स गिरती है। ग्राहक को न संभालें तो payment नहीं आता। दस दिन छुट्टी लें तो सब बिगड़ जाता है।

आप बिज़नेस नहीं कर रहे। आप एक इम्प्लॉई हैं जो जॉब नहीं छोड़ सकते।

तो ये किताब आपको मोटीवेट या खुश नहीं करेगी। बेचैन करेगी। क्योंकि ये बताएगी कि आप क्या ग़लत कर रहे हैं। और कैसे ठीक कर सकते हैं।

Naseer Khan

Naseer Khan

मैं ये बात अंदाज़े से नहीं कह रहा।

मैंने 11 साल काम करने के बाद, इंडिया में डबल M.A. करने के बाद इटली में रहकर 2007–08 में यूरोप की सबसे पुरानी मचेराता यूनिवर्सिटी से MBA किया था।

मैंने पिछले तीन दशकों में Tata, Valvoline, Axis Bank, LIC, TAFE Tractors, Messe Frankfurt, Alstone, Vijan Mahal जैसे सैंकड़ों संगठनों की leadership और teams के साथ काम किया है।

मैं Neuro Coding का creator हूँ और Elevate Finishing School का founder।

लेकिन ये किताब stage की बातों से नहीं निकली। ये उन हज़ारों दुकानों, offices और छोटे कारोबारों से निकली है जहाँ मालिक खुद सबसे ज़्यादा काम करता है — और फिर भी सबसे ज़्यादा फँसा रहता है। ये किताब मेरे कई सालों का मार्केट का तजुर्बा है।

जो बिज़नेस बढ़ रहे हैं और जो अटके हुए हैं उनमें फ़र्क़ क्या है?

ज़्यादा मेहनत? नहीं।
ज़्यादा पैसा? नहीं!
असली फ़र्क़ है — system और process।

एक कामयाब बिज़नेस को पता होता है कि नए लोगों तक कैसे पहुंचना है। कस्टमर को फैन में कैसे कन्वर्ट करना है। किसी ग्राहक ने ख़रीदना क्यों बंद किया। उसे कैसे वापस लाते हैं। Price क्या होनी चाहिए ताकि प्रॉफिट बने, स्टॉक बेकार न पड़ा रहे।

और ये सब वो खुद नहीं करते। सिस्टम और टीम से करवाते हैं।

ये किताब उन सवालों को सुलझाती है जो आपको रात भर जगाते हैं:

  • ग्राहक वापस क्यों नहीं आ रहे?
  • दुकान भरी है पर पैसा क्यों नहीं बन रहा?
  • एक हफ़्ता ग़ायब हो जाऊँ तो सब क्यों ढह जाता है?
  • ये थकान कब ख़त्म होगी?
  • दूसरे बढ़ रहे हैं, मैं क्यों नहीं?

सब का जवाब इस किताब में है। असली हल के साथ। सिर्फ़ बातें नहीं।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “सच्चा और अमानतदार ताजिर नबियों, सिद्दीक़ों और शहीदों के साथ होगा।” (तिर्मिज़ी)

ये किताब आपको वही रास्ता दिखाती है — हलाल कमाई के साथ बरकत, क़ुरआन-सुन्नत की रोशनी में modern business strategies, और इस दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी।

असली मालिकों ने क्या कहा

“हर रोज़ दो हज़ार रुपये गायब हो रहे थे। पता नहीं चल रहा था। Pricing वाला chapter पढ़ा — एक हफ़्ते में सब बदल गया। अब महीने में पैंतालीस हज़ार ज़्यादा बचत। और सबसे बड़ी बात — अब मुझे यक़ीन है कि मेरी कमाई हलाल है और इसमें बरकत है।”
— हामिद अंसारी, टेक्सटाइल डिस्ट्रिब्यूटर, भिवंडी
“मेरी दुकान बिना मेरे चल नहीं सकती थी। इस किताब में जो 3 system बताए गए, वो लगाए। अब चलती है। आगरा, दिल्ली और अजमेर का टूर लग गया — sales भी बढ़ गई। काफी वक़्त बाद फैमिली के साथ ठीक से वक़्त बिताया। अलहम्दुलिल्लाह।”
— आइशा मलिक, कॉस्मेटिक्स रिटेल, भोपाल
“मुझे लगता था अमीर बनना चाहना ग़लत है। चैप्टर 1 पढ़ा तो पूरी सोच बदल गई। समझ आया कि ‘ऊपर का हाथ’ बनना ही असल मक़सद है। ग्राहक retention वाले चैप्टर्स apply किए — दो महीने में repeat customers 15% बढ़े। अब ज़्यादा कमा रहा हूँ और ज़्यादा सदक़ा भी कर पा रहा हूँ।”
— अब्बास मेमन, हार्डवेयर स्टोर, इंदौर

₹399 — एक दिन में अपनी क़ीमत निकाल लेगी

सोच लीजिए:

  • एक ग़लत price decision: पाँच हज़ार हर महीना गायब = साल में साठ हज़ार
  • बिना system के काम करना: आपके साल के तीन हज़ार छह सौ घंटे गायब — वो वक़्त जो परिवार, इबादत, और आराम के लिए होना चाहिए था
  • एक ख़राब महीना: बीस हज़ार का नुक़सान
  • एक ग़लत hiring: पचास हज़ार डूबा + महीनों की परेशानी
  • ग़लत beliefs के साथ जीना: आपकी पूरी ज़िंदगी रुकी रहती है — न growth, न सुकून, न बरकत

ये किताब सिर्फ़ तीन सौ निन्यानवे रुपये

एक चीज़ ठीक करने से दस गुना वापस मिल जाएगा।

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7 दिन की पूरी पैसे वापस guarantee: एक भी chapter apply करके फ़र्क़ नहीं दिखा, हमें email करें। बिना किसी सवाल के पूरे पैसे वापस।

“अल-यदुल् उल्या ख़ैरुम् मिनल् यदिस् सुफ़्ला”
देने वाला हाथ लेने वाले हाथ से बेहतर है।

लेकिन देता कौन है? जिसके पास है।

और किसके पास है? जो हलाल तरीक़े से, समझदारी से, सिस्टम के साथ कमाता है।

यही इस किताब का मक़सद है — आपको “ऊपर का हाथ” बनाना।

ताकि आप:

  • अपने परिवार की ज़रूरतें पूरी कर सकें
  • बच्चों को बेहतर तालीम दे सकें
  • क़ौम, मस्जिद और मदरसे में अपना रोल अदा कर सकें
  • ग़रीबों और यतीमों की मदद कर सकें
  • इस उम्मत के लिए नफ़ा का ज़रिया बन सकें
  • और अल्लाह के यहाँ जवाबदेह हों — “जो दिया वो हलाल था, जो कमाया उसमें हक़ अदा किया”

ये किसके लिए है

  • मुसलमान कारोबारी जो halal कमाई चाहते हैं पर फंसे हुए हैं
  • दुकानदार जो खुद दुकान चलाते हैं (और छुट्टी नहीं ले पाते)
  • छोटे manufacturers और service providers (5–50 employees)
  • थोक कारोबारी और distributors
  • नया बिज़नेस शुरू करने वाले — ताकि सही शुरुआत हो
  • जो सोचते हैं “शायद अल्लाह मुझे ग़रीब ही रखना चाहते हैं” — और इस belief से निकलना चाहते हैं

ये किसके लिए नहीं है

  • जो सिर्फ़ पढ़ना चाहते हैं, apply नहीं करना
  • जो haram तरीक़ों से पैसा बनाना चाहते हैं
  • जो overnight results चाहते हैं बिना मेहनत के

आम सवाल

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क्या ये सिर्फ़ Muslims के लिए है?

Islamic principles और Quranic guidance लगभग हर चैप्टर में है। यही इस किताब की रूह है। Non-Muslims भी business strategies apply कर सकते हैं, पर मरकज़ी ऑडिएंस मुसलमान कारोबारी हैं।

क्या मेरे type के बिज़नेस पर काम करेगी?

Retail, manufacturing, service, wholesale, online — कोई भी small-to-medium business। Principles universal हैं, examples भारतीय बाज़ार के हैं।

मैं already ठीक-ठाक कर रहा हूँ, क्या फिर भी?

अगर आप बिना छुट्टी के काम कर रहे हैं, या system नहीं है, या ग्राहक retention कम है — तो ज़रूरी है। और अगर सब ठीक है तो chapters 11–12 में scaling और continuous improvement strategies हैं।

Apply करने में कितना time लगेगा?

हर chapter actionable है। पहला week — cash flow track करना शुरू। दूसरा week — pricing check। तीसरा week — पहला system। 90 दिन में पूरी तबदीली दिखेगी insha’Allah।

Guarantee क्या है exactly?

7 दिन। किताब मिलने के बाद एक भी chapter try करें। फ़र्क़ न दिखे तो email करें — पूरे पैसे वापस, कोई सवाल नहीं।

Delivery कैसे होगी?

भारत में कहीं भी 5–7 दिन में।

तो आप अगले पाँच साल भी ऐसे ही चलाते रह सकते हैं।

या अभी ठीक करने की शुरुआत कर सकते हैं।

ये motivation नहीं।
मैथ है।

हर साल जो यूँ ही निकल जाता है, उसकी क़ीमत आपको चुकानी पड़ती है — पैसों में, वक़्त में, और उस ज़िंदगी में जो जी नहीं पाए।

200 pages।
19 chapters।
Step-by-step system।
क़ुरआन-सुन्नत की रोशनी में modern business strategies।
Halal कमाई।
Barkat वाली growth।
दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी।
7 दिन की पूरी पैसे वापस guarantee।

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हलाल दौलत अभीorder करें — ₹399

P.S. — अगले महीने भी वही cash flow की टेंशन? वही “मैं छुट्टी नहीं ले सकता”? वही belief कि “शायद मेरी क़िस्मत में ग़रीबी ही है”?

या 399 रुपये में — system, clarity, Islamic guidance, और वो तबदीली जो आपकी तीन पीढ़ियों तक असर डालेगी।

सहाबा ने दिखाया — दौलतमंद और जन्नती दोनों बना जा सकता है। अब्दुर रहमान बिन औफ़, उस्मान बिन अफ़्फ़ान, अबू बक्र — सबने। आप भी बन सकते हैं।

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चैप्टर्स की लिस्ट

  1. आज का मार्केट: ज़रूरी ज़मीनी हक़ीक़त
  2. वो ऑटो जिसने उड़ना चुन लिया
  3. ये किताब क्यों लिखी — और अभी क्यों?
  4. आप क्यों फंसे हुए हैं
  5. तवक्कुल और तवाकुल, इल्म और अमल
  6. विज़न — आपका बढ़ना यहीं से शुरू होता है
  7. इक़रा — सीखते रहिए
  8. बदलो — ठहरना मतलब मरना
  9. ग्राहक नहीं दीवाने बनाओ
  10. वफ़ादार कस्टमर = बिग प्रॉफ़िट
  11. रेफ़रल बढ़ाओ, बिज़नेस बढ़ेगा
  12. ब्रांडिंग: अपनी पहचान कैसे बनाएँ
  13. ऑनलाइन दिखना ही होगा
  14. प्राइसिंग: ग्राहक और बिज़नेस दोनों ख़ुश
  15. अकेले मत चलिए — टीम बनाइये
  16. सिस्टम बनाइए, आज़ादी पाइए
  17. कामयाब और हलाल पार्टनरशिप
  18. पैसा, टैक्स और क़ानूनी काम
  19. सदक़ा-ए-जारीया: सिस्टम जो आदमी के बाद भी चलता रहता है
  20. ख़ातिमा — मुसलमान जो बनाता है, अल्लाह उसे बढ़ाता है

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